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Thread: Jo Beet Gayi So Baat Gayi

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    Insha is offline FT Assistant
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    Default Jo Beet Gayi So Baat Gayi

    जीवन में एक सितारा था
    माना वह बेहद प्यारा था
    वह डूब गया तो डूब गया
    अंबर के आंगन को देखो
    कितने इसके तारे टूटे
    कितने इसके प्यारे छूटे
    जो छूट गए फ़िर कहाँ मिले
    पर बोलो टूटे तारों पर
    कब अंबर शोक मनाता है
    जो बीत गई सो बात गई

    जीवन में वह था एक कुसुम
    थे उस पर नित्य निछावर तुम
    वह सूख गया तो सूख गया
    मधुबन की छाती को देखो
    सूखी कितनी इसकी कलियाँ
    मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ
    जो मुरझाईं फ़िर कहाँ खिलीं
    पर बोलो सूखे फूलों पर
    कब मधुबन शोर मचाता है
    जो बीत गई सो बात गई

    जीवन में मधु का प्याला था
    तुमने तन मन दे डाला था
    वह टूट गया तो टूट गया
    मदिरालय का आंगन देखो
    कितने प्याले हिल जाते हैं
    गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
    जो गिरते हैं कब उठते हैं
    पर बोलो टूटे प्यालों पर
    कब मदिरालय पछताता है
    जो बीत गई सो बात गई

    मृदु मिट्टी के बने हुए हैं
    मधु घट फूटा ही करते हैं
    लघु जीवन ले कर आए हैं
    प्याले टूटा ही करते हैं
    फ़िर भी मदिरालय के अन्दर
    मधु के घट हैं,मधु प्याले हैं
    जो मादकता के मारे हैं
    वे मधु लूटा ही करते हैं
    वह कच्चा पीने वाला है
    जिसकी ममता घट प्यालों पर
    जो सच्चे मधु से जला हुआ
    कब रोता है चिल्लाता है
    जो बीत गई सो बात गई
    Last edited by Insha; 11-14-2010 at 01:52 AM.

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