कभी कभी बहूत सुकून देति है
हरपल चुभने वाली तन्हाई भी
जाने कैसा मौसम आ गया है की
गुम हो गयी है कहीं आपकी परछाई भी
किसी के प्यार में इतनी सच्चाई हो कि
कम लगने लगे सागर कि गहराई भी
दिल अगर साफ़ हो उसका तो
आंसुओं में नज़र आये सफ़ाई भी
पार रहकर अगर भर दे दामन खुशियों से
तो यादों की सौगात लाये उसकी जुदाई भी
दिल को छु ले अगर बातें उसकी
तो मासूम हो उसकी रुसवाई भी