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Thread: मैं स्वयं को खोज रहा हूँ...

  1. #1
    Insha is offline FT Assistant
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    Apr 2010
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    353

    Default मैं स्वयं को खोज रहा हूँ...

    रात की दस्तक दरवाज़े पर है,
    आज का दिन भी बीत गया है,
    कितना था उजाला फिर भी फिर से,
    अन्धियारा ही जीत गया है,

    एकान्त की चादर ओढ़ कर फिर से
    मैं खुद में खोया जाता हूँ,
    आँखों के सामने यादों के रथ पर
    मेरा ही अतीत गया है,

    सन्नाटों के गुन्जन में दबकर,
    अपनी ही आवाज़ नहीं आती मुझको,
    आँखों की सरहद पर लड़ता,
    आँसू भी अब जीत गया है,

    टूटे दर्पण के सामने बैठकर,
    मैं स्वयं को खोज रहा हूँ,
    यूँ ही बैठे बैठे जाने,
    कितना अरसा बीत गया है...

  2. #2
    Anjaan is offline FT Co-Admin
    Join Date
    Feb 2009
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    109

    Default Re: मैं स्वयं को खोज रहा हूँ...

    nice...

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